Posted on 02 Feb, 2017 6:18 pm

 

जल-संरक्षण के लिये म.प्र. के प्रयासों की सराहना
विश्व जलाशय दिवस पर एप्को में राष्ट्रीय कार्यशाला सम्पन्न 

 

भोपाल : गुरूवार, फरवरी 2, 2017, 16:44 IST

 

जन-सहयोग से ही जलाशयों का संरक्षण संभव है। केन्द्र एवं राज्य सरकार के प्रयासों के अपेक्षित परिणाम जन-सहयोग के बिना संभव नहीं है। यह बात विश्व जलाशय दिवस पर एप्को परिसर में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में मुख्य अतिथि केन्द्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव डॉ. अमिता प्रसाद ने कही। उन्होंने सहभागियों से अपील की कि जलाशय के संरक्षण के लिए हर संभव कारगर प्रयास करें। वेटलेंड ( तालाब, जलाशय, झील, पोखर आदि) जीवन के लिए अति आवश्यक है, इन्हें प्रदूषण एवं अतिक्रमण से बचाना होगा।

डॉ. अमिता प्रसाद ने कहा कि वेटलेंड की मानव एवं पशु जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका है। इनसे कई पशु-पक्षियों, पौधों एवं मानव समूह का जीवन संचालित होता है। साथ ही वेटलेंड भू-जल स्तर बढ़ाने में महत्वूर्ण है। प्रत्येक नागरिक का कर्त्तव्य है कि वेटलेंड के संरक्षण के लिए योगदान अवश्य दें। उन्होंने कहा कि सभी प्रचार माध्यमों का उपयोग कर जन-जागरूकता लायी जाये। वर्तमान में नियम भी हैं विशेषज्ञ भी हैं और कार्यकर्ता भी हैं। आवश्यकता केवल कार्य में प्रगति लाने की है। डॉ. प्रसाद ने बताया कि विश्व के लगभग 170 देशों में विश्व जलाशय दिवस मनाया जा रहा है। उन्होंने इस क्षेत्र में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों की सराहना की। डॉ. प्रसाद ने सिंहस्थ में आयोजित वैचारिक महाकुंभ के दौरान क्षिप्रा के जल की गुणवत्ता सुधारने के लिए राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना की।

प्रमुख सचिव नगरीय विकास, आवास एवं पर्यावरण श्री मलय श्रीवास्तव ने कहा कि जलाशय संरक्षण के लिए प्रदेश सरकार द्वारा चौतरफा प्रयास किए जा रहे हैं। 'नमामि देवि नर्मदे'' अभियान देश ही नहीं विश्व का अनूठा एवं कारगर प्रयास है। इस अभियान से जन-समूह एवं विभिन्न संगठन स्वेच्छा से जुड़ रहे हैं। अभियान अशासकीय रूप से, जन-भागीदारी से सफलता से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि करीब छ: माह में यात्रा 16 शहरों से होकर गुजरेगी। यात्रा के दौरान जन-जागरूकता, पौध-रोपण, नर्मदा नदी का प्रदूषण से संरक्षण, नदी के आस-पास एवं घाटों की स्वच्छता, सीवर ट्रीटमेंट प्लांट, प्रत्येक घर में शौचालय सहित अन्य कार्य किये जायेंगे। उन्होंने बताया कि अमृत योजना में प्रदेश के चौंतीस शहरों का चयन हुआ है। इन शहरों में स्वच्छता सर्वेक्षण का कार्य चल रहा है। बीस शहर को खुले में शौच से मुक्त किया जा चुका है। शहरी विकास के भी कई कार्य इन शहरों में किए जा रहे हैं। उन्होंने अपेक्षा की कि इस दिशा में वर्कशाप में आये विशेषज्ञों का मार्गदर्शन प्राप्त होगा।

विश्व जलाशय संरक्षण दिवस पर सप्ताह भर विभिन्न प्रतियोगिता एवं कार्यक्रम आयोजित किए गए। चित्रकला एवं फोटोग्राफी प्रतियोगिता के विजेता प्रतिभागियों को अतिथियों द्वारा पुरस्कृत किया गया। अतिथियों ने बच्चों द्वारा बनायी पेटिंग्स एवं फोटोग्राफ्स की प्रदर्शनी का अवलोकन कर सराहना की। वर्कशाप में विभिन्न प्रदेश से आये विशेषज्ञ एवं कार्यकर्ता शामिल हुए।

 

साभार – जनसम्पर्क विभाग मध्यप्रदेश